कलिंगा के भूमि से लिख रहा हूँ...
कल मैंने कहा था, दुनिया बुद्धिझम का Reconstruction पर चल रही है।
यह करोना कि जानकारी चीन ने छिपाई यैसा अमेरिका राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रंप ने यह आरोप लगाया। उसके मद्देनजर कुछ लोगों के पोस्ट और यु ट्यूब पर इस बारे में वीडियो भी देख रहा था।
उसमें कहा गया कि चीन ने यह बीमारी पहले अपने ही देश में लाई। अपने 3000 नागरिकों की जान दे डाली। उससे चीन के चलन का अवमूल्यन हुवा। चीन में ज्यो अमेरिका और यूरोपीय देशों की कंपनियां 40% नीचे डूब गई थी। चीन ने उनके 30 % शेयर्स खरीद लिया। उससे चीन को 20 हजार अब्ज डॉलर की कमाई होंगी। उससे सभी आर्थिक ताकद चीन के पास खड़ी होंगी।
यह भी कहा गया कि 14 दिन में 12 हजार कॉट का अस्पताल यह बीमारी आने से बना है यह झूठ है। यह पहले ही बना है। अब वुहान शहर से क्या सारे चीन से करोना गायब हुवा। उन्होंने वैक्सीन भी बना लिया। वैसे वैक्सीन उन्होंने पहले ही बनाई थी। अब दुनिया उस वैक्सीन को चीन बेचेंगा। 1.1 ट्रिलियन डॉलर की अमेरिका की तिजोरी उसके कब्जे में है। यह भी कहा गया कि रशिया और उत्तर कोरिया में करोना नहीं है। इसका कारण वह राष्ट्र चीन के कट्टर समर्थक है।
अब मेरे मुद्दे पर आता हूं, करोना आने के पहले अमेरिका ने क्या किया , यह भी जानते हैं। चीन का जितना प्रोडक्शन था, उस पर बड़े पैमाने पर आयात शुल्क ज्यादा लगाया था। तो चीन का यह महंगा माल कोई अमेरिका में लेना पसंद नहीं कर रहा था।
तब चीन ने दूसरा खेल खेला, चीन ने उसके देश में फेसबुक, विकिपीडिया जैसी अमेरिकन कंपनी पर पाबंदी लगाई। अपना सोशल मीडिया तयार किया। अपने देश में चीनी भाषा के अलावा अन्य भाषा को नो एंट्री का मानो बोर्ड लगाया।
वास्तव में यह खेल आर्थिक वसाहतवाद का लगता है। मगर मैं चीन के समर्थन में ज्यादा हूँ। चीन अपना प्रोडक्ट लो प्रोडक्शन कॉस्ट में बनाता है। इसलिए वह अपनी वस्तु सस्ते दामों में बेच सकता है। यैसी भी जानकारी प्राप्त हुई हैं कि चीन दो प्रकार की एक ही वस्तु बनाता है, ज्यो एक महंगी और अच्छे गैरन्टी, वारन्टी वाली वस्तु बनाता है। दुनिया में जिनकी आय कम है, उन राष्ट्र को या दुनिया किसी भी व्यक्ति जिसकी पेईंग कैपिसिटी नहीं उनको नो गैरंटी, नो वारन्टी की सस्ती कीमत की वस्तु बेचता है।
यह तो वास्तव में बिजनेस स्ट्रैटेजी है। यह आम तौर होता है। भारत में मुंबई में Made in USA (उल्हासनगर सिंधी असोसिएशन), मध्यप्रदेश में कटनी जिलें में यही डुप्लीकेट काम चलता है। कल लौटा लेकर आये सिंधी समाज आज इस देश के मूलनिवासियों के हाथ में लौटा थमा दिया। मगर चीन का कोई भी प्रोडक्ट डुप्लीकेट नहीं होता हैं, वह केवल नो गैरंटी, नो वारन्टी का हो सकता है। जब तक चला अपना,बंद हो गया कबाड़ियों का ( Use & Throw) है।
अब पहले मुद्दे पर आते हैं, चीन ने स्वयं यह वायरस तैयार किया होंगा ? कल मैंने लिखा था कि करोना वायरस यह कुछ वैज्ञानिक के मुताबिक चीन के लोग कुछ भी खाने से यानी अति मांसाहारी भोजन करने होता है। उस पर कुछ विरोधी कमेंट भी आये। व्हाट्सएप पर मेरे इस कथन का विरोध भी किया। मैंने उनको जबाब भी दिया कि यह मेरा विचार नहीं ,यह कुछ वैज्ञानिक कह रहे हैं ।उन्होंने यह भी कहा, चीनी लोग तो हजारों साल से यह खा रहे हैं, तो तब क्यों नहीं हुवा। मेरा यह कहना है कि आदमी को बुखार एकदम नहीं आता, एकदम पेट दर्द नहीं होता, ना पत्थरी की बीमारी एकदम नहीं होती। सारा बैकलॉग एकदम निकल भी आ सकता है।
ज्यो कहते है, उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय देशों की कंपनियों के शेयर्स सस्ते दामों पर ले लिया। यह तो धूर्त राजनीति होती है। रशिया और उत्तर कोरिया में यह करोना नहीं गया क्योंकि यह चीन के कट्टर समर्थक हैं। तो मेरा कहना है तो भारत क्यों चीन का कट्टर समर्थक नहीं बनता है ? यह बात मैंने पिछले दो साल पहले एक पोस्ट में लिखा था।
भारत और चीन एक दूसरे के कट्टर समर्थक होते हैं तो सामयिक मुद्दे है।
1.चीन और भारत की सीमा लगी हुई है। व्यापार करना आसान होता हैं।
2. चीन और भारत की जनसंख्या मिलाकर दुनिया की लगभग आधी आबादी है। मनुष्यबल यह सबसे बड़ी ताकद है, दोनों देश इस्तेमाल करते तो दुनिया पर राज कर सकते।
3. यह मुद्दा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, दोनों के सांस्कृतिक विरासत बुद्ध है। उसी बुद्ध विचारों को चीन Reconstruction पर चल रहा है। बुद्ध की विचारधारा का आदान प्रदान पहले चीनी यात्री फाहियान से चल रहा है।
इसी बौद्ध विचारों पर सम्राट अशोक का राज भी दुनिया के कई राष्ट्रों की सीमाओं को लांघते गया था। नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन अपनी किताब में लिखते हैं, सम्राट अशोक के सुवर्ण काल में 33 % देश का जीडीपी था। उसी को कहा जाता था, इस देश में सोने की चिड़िया उड़ती थी। मगर यह भी कहना पड़ रहा है, जहां फलता फूलता है वहाँ बिकता नहीं। यैसा ही बुद्धिझम के बारे में हुवा है।
अब हम यह भी देखते हैं, भारत अब क्या कर रहा है। भारत का वास्तविक शासक वर्ग विदेशी ब्राह्मण अमेरिका के ज्यू और इस्रायली यहूदियों का साथ दे रहा है। ज्यो दुनिया पर केवल हिंसाचार के आधार पर राज करना चाहते हैं।
भारत ने अपनी विरासत बुद्ध का Reconstruction का सिद्धान्त अपनाना था, वह पेटन्ट प्राचीन काल से हमारे पास है। मगर हमारे यहाँ तो राम मंदिर के कंस्ट्रक्शन करने का फॉग चल रहा है। इस देश में राम राज्य निर्माण करने में लगे हैं। उसके लिए पिछले हप्ते रेल मंत्री ने राम के स्थलों के दर्शन की नई रेल्वे शुरू किया। विदेशी ब्राह्मण हमारे मूलनिवासी बहुजन समाज को गुलाम बनाने के लिए काम करता है, अमेरिका, चीन,इंग्लैंड या अन्य देश अन्य राष्ट्रों को अपना गुलाम बनाने के काम करने में सारी ताकद लगाते हैं।
अतः यही कहना चाहता हूं, बुद्ध के विचारों से यह भारत देश विश्वगुरु बन सकता है। वर्णव्यवस्था का समर्थन करने वाली मनुस्मृति से नहीं हो सकता। हमारे मूलनिवासी बहुजन समाज के लोग भी कभी शाइनिंग इंडिया तो कभी मेक इन इंडिया में उलझ जाते हैं। अब महान प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में भगतराम जैसे दिन काँट रहे हैं।
Ravindra Rane

0 Comments: