लालू यादव और लाल कृष्ण आडवाणी
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रथ यात्रा और मंडल कमिशन
कैसे मुस्लिम के दिल पर छा गए..?कैसे बिहार को दंगा से बचाया गया..?
मंडल कमीशन ने आरएसएस विचारकों को नींद खराब कर दी...तब आरएसएस ने ओबीसी को मंडल कमिशन के मुद्दे से भटकाने के लिए आयोध्या बाबरी मस्जिद का मुद्दा उठाया..आरएसएस ओबीसी को मुस्लिम से दंगा फसाद में उलझाना चाहते लेकिन लालू ने इसे पहले ही भाप लिया..
आपके सामने स्क्रीन पर जो तस्वीर दिखाई दे रही है..वो राम रथ यात्रा निकलने से पहले दिल्ली में लालू यादव और लाल कृष्ण आडवाणी से रथ यात्रा के संवाद मुद्दे पर है..लालू यादव ने बिहार से रथ यात्रा के लिए आदरपूर्वक बोले कि बिहार में हम नहीं चाहते कि दंगा फसाद हो..इसलिए इस यात्रा को बिहार में मत लाइए..वहां संप्रदायिक माहौल खराब हो सकती है..आडवाणीजी अंहकार भरे शब्दों में बोले कि कोई माय का लाल पैदा नहीं हुआ जो राम रथ यात्रा को रोक दे..लालू जी ने कहा कि हमने भैसिया और मैया दोनों के दूध पिया..राज रहे या ना रहे लेकिन सम्प्रदायिक ताकतों को बिहार में हावी नहीं होने देंगे..उसके बाद लालू यादव बिहार चले आए..
लालू यादव बिहार पहुंचते ही बड़े बड़े अधिकारी के साथ बैठकर मीटिंग करने लगे और प्लान बनाए लेकिन गिरफ्तारी के लिए पुलिस नाकाम साबित हुई..
लालू यादव ने सोचा कि आखिर हमारे अधिकारी और नेताओं में कोई ऐसा व्यक्ति है जो हमारी गुप्त सूचना मीडिया और आडवाणी तक पहुंचा रहा..इसलिए समस्तीपुर से रथ यात्रा प्रारंभ होती..कुछ गुप्त लोगो से मिलकर लालू यादव ने आडवाणी को नजर बन्द कर लिया..उसे अरेस्ट करवा कर गेस्ट हाउस में रखे..सम्मान के साथ खाना पीना देते रहे...लेकिन मीडिया और नेताओं ने आरोप लगाए कि आडवाणी को जहर देकर मार दिया..लालू यादव को जनता का अधिक प्यार मिला..मीडिया और नेताओं जितना भी किरकिरी करते लालू हमेशा जनता के बीच चले जाते..आपनी ताकत को मीडिया से नहीं बल्कि जनता के बीच महसूस करते..
भारत समेत कई देशों बड़े बड़े नेताओं आडवाणी के गिरफ्तारी को देखकर बहुत अचंभित थे और इसी घटना से लालू यादव की जान पहचान विदेशों में अत्यधिक होने लगी।
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि लालू यादव को खूब गाली दिया जा सकता..आलोचना की जा सकती लेकिन धरती पर दूसरा लालू पैदा नहीं हो सकता..
मेरा दृष्टिकोण :
लालू यादव के राज में कभी दंगा जैसी स्थिति देखने को नहीं मिली..जनता इस बात को स्वीकार करती है कि लालू ने हमें स्वर्ग नहीं दिया किंतु स्वर जरूर दिए..कई बूढ़े व्यक्ति से बात करता हूं तो लालू के बारे में बताते है कि लालू ने एससी एसटी और ओबीसी को स्वर देकर सवर्ण समाज के सामाजिक समानता पर ला दिए...
कुछ दरभंगा के जनता से बात किया तो बोले हमारे पूर्वज कहते है कि लालू यादव जब भी दरभंगा आते जिस अवस्था में रहते उसी अवस्था में हमारे साथ बैठकर साग रोटी खाते...
यानी लालू यादव की कार्य राजनीतिक नहीं होकर समाजिक अधिक रहा..
रिपोर्ट - रंजीत कुमार

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